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संयुक्त राष्ट्र समिति ने दलितों, आदिवासियों और रोहिंग्या शरणार्थियों के विरुद्ध हिंसा पर गंभीर चिंता व्यक्त की
संयुक्त राष्ट्र की एक समिति ने भारत में दलितों और आदिवासियों के विरुद्ध भेदभाव और घृणा अपराधों पर गंभीर चिंता जताई है। समिति ने भारत सरकार से इन उल्लंघनों को तुरंत संबोधित करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने का आह्वान किया है।
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संयुक्त राष्ट्र की एक प्रमुख समिति ने भारत में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और रोहिंग्या शरणार्थियों के विरुद्ध मानवाधिकारों के उल्लंघन पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। समिति ने भारतीय सरकार को इन समुदायों के खिलाफ भेदभाव, घृणा भाषण और हिंसक अपराधों को तुरंत संबोधित करने के लिए कहा है।
यह चिंता अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार तंत्र द्वारा भारत में सामाजिक और धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा की समीक्षा के बाद व्यक्त की गई है। समिति ने विशेष रूप से दलितों और आदिवासियों को लक्षित करने वाली घटनाओं के साथ-साथ रोहिंग्या शरणार्थियों की स्थिति पर ध्यान दिया है।
समिति ने भारत सरकार से न केवल इन उल्लंघनों को रोकने के लिए कदम उठाने बल्कि यह भी सुनिश्चित करने का आह्वान किया है कि इन अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह बनाया जाए। संयुक्त राष्ट्र ने भारत से कानूनी सुरक्षा को मजबूत करने और पीड़ितों के लिए न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने की अपेक्षा की है।
यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से भारत में सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों की रक्षा के प्रति बढ़ती चिंता को दर्शाती है। भारत सरकार अभी तक इन आरोपों पर आधिकारिक रूप से टिप्पणी नहीं की है।