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समान नागरिक संहिता समाज को विभाजित करेगी: कांग्रेस
महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने वाली समिति से पूर्व बॉम्बे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का इस्तीफा विपक्ष की आलोचना को बल दे रहा है।
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विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के कार्यान्वयन को लेकर सरकार की नीति को समाज को स्थायी रूप से विभाजित करने का माध्यम बताया है। पार्टी की यह आलोचना महाराष्ट्र सरकार की यूसीसी मसौदा समिति से एक प्रमुख न्यायिक सदस्य के इस्तीफे के बाद आई है।
पूर्व बॉम्बे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस आर.सी. चव्हाण ने समिति से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उन्होंने इस्तीफे में राष्ट्रीय महत्व के सामाजिक मुद्दों पर जनता की प्रतिक्रिया को केवल 'हां/नहीं' के प्रारूप तक सीमित किए जाने के फैसले पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं।
जस्टिस चव्हाण के इस कदम को समिति के कार्य में स्वतंत्र दृष्टिकोण की कमी का प्रमाण माना जा रहा है। उनका मानना है कि इस तरह की प्रतिबंधात्मक प्रक्रिया न केवल जनमानस को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगी बल्कि समाज में गहरी खाई पैदा कर सकती है।
कांग्रेस के इस बयान से स्पष्ट है कि यूसीसी को लेकर विभिन्न राजनीतिक विचारों में मतभेद बना हुआ है। पार्टी का तर्क है कि धार्मिक और सामाजिक विषयों पर देश की विविध जनता से खुले संवाद के माध्यम से ही संवैधानिक सुधार संभव हो सकते हैं।