Politics · India Bureau
ब्रिटेन की प्रवासी नीति से देश के बड़े स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को खतरा
ब्रिटेन की सख्त प्रवासन नीति से बुजुर्गों की देखभाल के क्षेत्र में व्यापक चिंता पैदा हो गई है। इस 20 अरब डॉलर के क्षेत्र में लगभग एक-तिहाई कर्मचारी विदेशी मजदूर हैं।
LSN India ·

ब्रिटेन की सरकार द्वारा प्रवासन को कसा जाने से देश के वयस्क देखभाल क्षेत्र में गहरी चिंता व्याप्त हो गई है। कार्य अधिकार केंद्र के अनुसार, इस विशाल क्षेत्र में कार्यरत कुल कर्मचारियों का लगभग 33 प्रतिशत हिस्सा अप्रवासी कार्यकर्ताओं का है। ये विदेशी कर्मचारी बुजुर्ग नागरिकों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रमुख आधार बने हुए हैं।
20 अरब डॉलर मूल्य के इस क्षेत्र में नई प्रवासन प्रतिबंधात्मक नीतियों के कारण कर्मचारियों की भारी कमी की संभावना जताई जा रही है। स्वास्थ्य सेवा प्रदानकारियों को यह आशंका है कि सख्त वीजा नियमों और रोजगार शर्तों के कारण विदेशी कार्यकर्ताओं को काम करने में बाधा आएगी। इससे देश में बुजुर्गों की देखभाल के लिए उपलब्ध कर्मचारियों की संख्या में गिरावट आ सकती है।
स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि प्रवासन नीति में बदलाव से न केवल सेवा की गुणवत्ता में गिरावट आएगी, बल्कि इससे पहले से ही पीड़ित यूके की स्वास्थ्य व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव भी पड़ेगा। देश भर के देखभाल संगठन इन नीतियों में संशोधन के लिए सरकार से अपील कर रहे हैं ताकि बुजुर्गों को मिलने वाली सेवाओं में कोई व्यवधान न आए।