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सौर ऊर्जा और कृषि का अनोखा मेल: भेड़ पालक ने बढ़ाई भेड़ों की संख्या दस गुना
सौर पैनलों के नीचे भेड़ों को चराने की पद्धति से किसानों को अतिरिक्त भूमि का उपयोग करने का अवसर मिल रहा है। इस नवाचारी व्यवस्था से युवा और छोटे किसानों के लिए कृषि व नवीकरणीय ऊर्जा दोनों का लाभ संभव हो गया है।
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सौर ऊर्जा फार्मों में भेड़ें चराने की व्यवस्था एक नई संभावना के रूप में उभर रही है, जहां पशुपालन और नवीकरणीय ऊर्जा का समन्वय किसानों के लिए लाभदायक साबित हो रहा है। इस विधि के जरिए भेड़ पालकों को न केवल अतिरिक्त चारागाह मिल रहा है, बल्कि सौर फार्मों का रखरखाव भी आसान हो जाता है।
ब्रिटेन की एक भेड़ पालक हन्ना थोरोगुड इसका जीवंत उदाहरण हैं। मात्र 18 एकड़ भूमि पर 20 भेड़ों के साथ शुरुआत करने वाली थोरोगुड अब 250 एकड़ में 200 भेड़ें पालती हैं। सौर पैनलों के तहत भेड़ें चराने की इस व्यवस्था ने उनके पशुपालन व्यवसाय को दस गुना बढ़ाने में सहायक साबित हुई है।
इस नवीन पद्धति में भेड़ें सौर पैनलों के नीचे की वनस्पति को चराती हैं, जिससे सौर फार्मों का रखरखाव व्यय कम हो जाता है और अनावश्यक वनस्पति भी नियंत्रित रहती है। एक ही भूमि पर ऊर्जा उत्पादन और पशुपालन दोनों संभव होने से किसानों की आय में वृद्धि होती है।
भूमि की उपलब्धता किसानों, विशेषकर युवा और छोटे किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती रही है। सौर चराई की यह योजना उन्हें सीमित भूमि पर भी आजीविका के विस्तृत विकल्प प्रदान करती है। कृषि और नवीकरणीय ऊर्जा का यह संयोजन आने वाले समय में कई किसानों के लिए आय का एक विश्वसनीय जरिया बन सकता है।