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यूएन ने माना: सुरक्षा परिषद सुधार में अब और देरी नहीं हो सकती
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों का समर्थन किया है कि यूएन सुरक्षा परिषद में सुधार अब और स्थगित नहीं किए जा सकते। प्रवक्ता ने माना कि वर्तमान ढांचा, जिसमें पांच स्थायी सदस्य हैं, आधुनिक विश्व की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करता।
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संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सुरक्षा परिषद के सुधार संबंधी टिप्पणियों का समर्थन किया है। प्रवक्ता ने स्वीकार किया कि यह संस्था अब और विलंब सहन नहीं कर सकती और इसे वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप बदलाव की जरूरत है।
वर्तमान में सुरक्षा परिषद की संरचना 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनाई गई थी, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ (अब रूस), ब्रिटेन, फ्रांस और चीन को स्थायी सीटें दी गई थीं। यह ढांचा आज की बहुध्रुवीय दुनिया में विकासशील देशों की आवाजों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं देता।
भारत ने लंबे समय से सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की मांग की है, जिसमें अधिक स्थायी और अस्थायी सदस्यों का समावेश शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी का यह रुख भारत की वैश्विक भूमिका और जिम्मेदारियों को बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
यूएन के इस समर्थन से संकेत मिलता है कि सुरक्षा परिषद सुधार के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में व्यापक सहमति बन रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह प्रक्रिया जटिल होगी, लेकिन संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।