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भारत में घृणा भाषण पर कार्रवाई के लिए संयुक्त राष्ट्र की सिफारिश
संयुक्त राष्ट्र की नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति ने भारत में घृणा भाषण, अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार और नागरिकता नीतियों पर चिंता जताई है। भारत सरकार ने इन निष्कर्षों को 'व्यापक सामान्यीकरण' बताकर खारिज कर दिया है।
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संयुक्त राष्ट्र की नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति (यूएनसीईआरडी) ने भारत में घृणा भाषण और घृणा अपराधों के बढ़ते मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में देश की नागरिकता संबंधी नीतियों और अल्पसंख्यकों के प्रति भेदभावपूर्ण रवैये के बारे में भी सवाल उठाए हैं।
संयुक्त राष्ट्र की इस अंतरराष्ट्रीय समिति ने भारत सरकार से घृणा भाषण और अपराधों को रोकने के लिए कंक्रीट कदम उठाने की सिफारिश की है। समिति के निष्कर्षों में भारतीय कानूनों की समीक्षा और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
भारतीय सरकार ने संयुक्त राष्ट्र समिति की रिपोर्ट में आपत्ति जताई है। सरकार का कहना है कि रिपोर्ट में 'व्यापक सामान्यीकरण' किया गया है और वास्तविक तस्वीर नहीं दी गई है। भारत ने अपने रुख में कहा है कि देश संविधान के तहत सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है।
यह विमर्श अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत में घृणा भाषण और सामाजिक सद्भाव के मुद्दों पर बढ़ती चिंता को दर्शाता है। समिति की सिफारिशें भारत की आंतरिक सुरक्षा और अल्पसंख्यकों के अधिकारों से संबंधित व्यापक बहस का हिस्सा हैं।