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संयुक्त राष्ट्र अवरुद्ध: जयशंकर ने कहा वैश्विक निकाय 'प्रासंगिक नहीं'
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दिल्ली में कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वैश्विक निकाय मुख्य निर्णय लेने में बड़े पैमाने पर अप्रासंगिक रह गया है।
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली पर तीव्र आलोचना की। दिल्ली में आयोजित पांचवें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में एक संवादात्मक सत्र के दौरान उन्होंने कहा कि वैश्विक निकाय वर्तमान में "गतिरोध" में फंसा है।
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र महत्वपूर्ण निर्णय लेने की प्रक्रिया में अपनी प्रभावशीलता खो चुका है। उन्होंने संकेत दिया कि यह अंतरराष्ट्रीय संस्था वैश्विक मामलों में सार्थक भूमिका निभाने में असमर्थ साबित हुई है।
विदेश मंत्री के विचार भारत सहित कई देशों द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं को प्रतिबिंबित करते हैं कि संयुक्त राष्ट्र की संरचना और कार्यप्रणाली समकालीन वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अपर्याप्त रही है।
जयशंकर की टिप्पणी अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बहुपक्षीय संस्थाओं की प्रासंगिकता पर एक व्यापक बहस के बीच आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वक्तव्य भारत की संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मांग को दर्शाता है और इसके वैश्विक भूमिका को मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।