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संयुक्त राष्ट्र गतिरोध में फंसा है: जयशंकर की आलोचनात्मक टिप्पणी
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र को गतिरोध की स्थिति में फंसा बताते हुए वैश्विक निकाय की प्रासंगिकता पर सवाल उठाए हैं। जयशंकर के अनुसार, यह बात अब सभी के लिए स्पष्ट है कि यूएन प्रभावी तरीके से काम नहीं कर पा रहा है।
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भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा है कि वैश्विक निकाय राजनीतिक गतिरोध की चपेट में है। जयशंकर की यह टिप्पणी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती असंतुष्टि को दर्शाती है, जहां स्थायी सदस्यों के बीच मतभेद महत्वपूर्ण निर्णय लेने में बाधा बन रहे हैं।
विदेश मंत्री के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के ढांचे में आंतरिक विरोध इसकी प्रभावशीलता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं। सुरक्षा परिषद समेत यूएन की विभिन्न संस्थाएं वर्तमान भू-राजनीतिक चुनौतियों का समाधान करने में असमर्थ दिख रही हैं। जयशंकर की यह स्पष्टवादी टिप्पणी अनेक विकासशील देशों की लंबे समय से कही जाने वाली बातों को दोहराती है।
भारत सहित कई देश संयुक्त राष्ट्र के संरचनात्मक सुधार की मांग करते रहे हैं ताकि यह निकाय आधुनिक वैश्विक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपट सके। वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों में स्थायी सदस्यों के आपसी मतभेद यूएन को लकवाग्रस्त कर देते हैं, जिससे महत्वपूर्ण मसलों पर कार्रवाई रुक जाती है।