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संयुक्त राष्ट्र को सुधारों की जरूरत: भारत का मुखर आह्वान
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की अनिवार्यता पर जोर दिया है, कहा कि 80 साल पुरानी संस्था आधुनिक दुनिया की चुनौतियों का सामना करने में असमर्थ साबित हो रही है।
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भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि अंबेसेडर हरीश पर्वतनेनी ने कहा है कि जो संगठन अपने प्रमुख अंगों को नवीनीकृत नहीं कर सकता, वह आज की तेजी से बदलती दुनिया में अपनी विश्वसनीयता खोता जा रहा है। पर्वतनेनी के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र की वर्तमान संरचना 1945 की दुनिया के लिए बनाई गई थी, जो आज के वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य से कहीं आगे निकल गया है।
भारत के इस बयान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार और सुधार की अनिवार्यता को रेखांकित किया गया है। भारत लंबे समय से यह तर्क दे रहा है कि परिषद की संरचना में वर्तमान सदस्यता विश्व की वास्तविक शक्ति संतुलन को प्रतिबिंबित नहीं करती है।
भारत का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र के अधिकार और प्रभाव को बनाए रखने के लिए इसके ढांचे में मौलिक परिवर्तन अपरिहार्य हैं। भारत सहित विकासशील देशों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग की जा रही है ताकि यह संस्था वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए प्रभावी भूमिका निभा सके।