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भारत में अनुमोदन के बिना एचटीबीटी कपास 30% क्षेत्र पर कब्जा: अध्ययन
एक नए अध्ययन में पता चला है कि आनुवंशिक रूप से संशोधित एचटीबीटी कपास भारत के कपास उगाने वाले क्षेत्र के लगभग 30% हिस्से में उगाई जा रही है, हालांकि इसे अभी तक सरकारी अनुमोदन नहीं मिला है। यह कपास किस्म खरपतवार नियंत्रण के लिए ग्लाइफोसेट का उपयोग करने की अनुमति देती है।
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एचटीबीटी कपास एक संकर किस्म है जो पारंपरिक बीटी कपास में शाकनाशी-सहनशीलता गुण जोड़ती है। इस तकनीक से किसान कीटों और खरपतवार दोनों को नियंत्रित करने के लिए बेहतर तरीके से रासायनिक उपायों का उपयोग कर सकते हैं। ग्लाइफोसेट जैसे शाकनाशी का उपयोग करके खरपतवार प्रबंधन में सुधार होता है, जो कपास की पैदावार बढ़ाने में मदद करता है।
अध्ययन के निष्कर्ष भारतीय कृषि नीति में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हैं। अनुमोदन प्रक्रिया को पूरा किए बिना इतनी बड़ी मात्रा में संशोधित बीजों का प्रसार चिंताजनक है। भारतीय कृषि और खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों की स्वीकृति के लिए कठोर परीक्षण और मूल्यांकन की आवश्यकता होती है।
एचटीबीटी कपास की बढ़ती व्यापकता संकेत करती है कि किसान इस तकनीक के लाभों को मान रहे हैं, लेकिन नियामक ढांचे में अंतराल बना हुआ है। यह स्थिति भारतीय कृषि विभाग को आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों के प्रति अपनी नीति को फिर से जांचने की आवश्यकता को दर्शाती है।
विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि नई किस्मों को बाजार में लाने से पहले उचित परीक्षण और अनुमोदन प्रक्रिया आवश्यक है, ताकि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।