Politics · India Bureau
निवारक निरोध, गिरफ्तारी और हिरासत में क्या अंतर है?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान तीन सीजेपी नेताओं को हिरासत में लिया गया। जानिए कानून के तहत निवारक निरोध, गिरफ्तारी और हिरासत का मतलब और इनमें क्या अंतर है।
LSN India ·

भारतीय कानून प्रणाली में निवारक निरोध, गिरफ्तारी और हिरासत तीन अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं जिनका अक्सर गलतफहमी होती है। हालांकि ये सभी व्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करती हैं, लेकिन इनके आधार, अवधि और कानूनी प्रावधान भिन्न होते हैं।
निवारक निरोध तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए संदेह न हो, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में माना जाए। इसके तहत प्राधिकारी संदिग्ध गतिविधि को रोकने के लिए किसी को बिना किसी आरोप के हिरासत में ले सकते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत निवारक निरोध की व्यवस्था है। इसमें व्यक्ति को तुरंत गिरफ्तारी के कारण बताने की आवश्यकता नहीं होती।
दूसरी ओर, गिरफ्तारी तब होती है जब पुलिस को किसी के द्वारा अपराध किए जाने का संदेह हो। गिरफ्तारी में पुलिस को व्यक्ति को अपराध से संबंधित कारण बताने होते हैं। हिरासत की अवधि कानून द्वारा निर्धारित होती है। अपराध की गंभीरता के अनुसार यह कुछ घंटों से लेकर कई दिन तक हो सकती है।
हिरासत वह स्थिति है जिसमें गिरफ्तारी के बाद किसी व्यक्ति को पुलिस की कस्टडी में रखा जाता है। हिरासत के दौरान पुलिस पूछताछ करती है। भारतीय दंड संहिता के तहत पुलिस आमतौर पर 24 घंटे की हिरासत के बाद व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होता है। जंतर-मंतर पर हुई घटना में गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों के मामले में भी ये ही कानूनी प्रावधान लागू होते हैं।