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भविष्य की चुनौतियों के लिए युवाओं को कौशल से लैस करें: सांसद
राधाकृष्ण डोडामणी का मानना है कि विश्वविद्यालयों को तेजी से बदलती दुनिया के अनुरूप शिक्षा प्रणाली में सुधार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों को आधुनिक कौशल विकास पर जोर देना होगा।
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कर्नाटक के सांसद राधाकृष्ण डोडामणी ने जोर देते हुए कहा है कि देश के विश्वविद्यालयों को अपनी शिक्षा व्यवस्था को पुनर्गठित करना चाहिए। वे मानते हैं कि उच्च शिक्षा संस्थानों का दायित्व है कि वे युवाओं को ऐसे कौशल से लैस करें जो आने वाले समय की मांगों को पूरा कर सकें।
डोडामणी के विचार से, तेजी से परिवर्तनशील वैश्विक परिदृश्य में भारतीय युवाओं को प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए नई शिक्षा पद्धति की आवश्यकता है। उन्होंने रेखांकित किया कि परंपरागत शिक्षा पद्धति अकेली पर्याप्त नहीं है और विश्वविद्यालयों को व्यावहारिक कौशल, प्रौद्योगिकी और नवाचार पर समान ध्यान देना चाहिए।
सांसद का मत है कि विश्वविद्यालय केवल सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान करने के स्थान तक सीमित नहीं रहें। उन्होंने बताया कि उद्योग-शिक्षा सहयोग को मजबूत करके और अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ तालमेल बिठाकर भारतीय उच्च शिक्षा को अपग्रेड किया जा सकता है।
डोडामणी का यह संदेश भारत के युवा जनसंख्या के भविष्य को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है। वे मानते हैं कि सही कौशल विकास से न केवल बेरोजगारी में कमी आएगी, बल्कि भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक मजबूत स्थान भी मिलेगा।