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कर्नाटक के पश्चिमी घाट में अवैध ट्रेकिंग से पारिस्थितिकी तंत्र को खतरा

पश्चिमी घाट के संवेदनशील इलाकों में पर्यटकों की अचानक भीड़ से स्थानीय लोगों को चिंता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस प्रवृत्ति से वनों, जल स्रोतों और वन्यजीव आवासों को अपरिवर्तनीय क्षति हो सकती है।

LSN India · 1 September 2026

कर्नाटक के पश्चिमी घाट में अवैध ट्रेकिंग से पारिस्थितिकी तंत्र को खतरा

कर्नाटक के पश्चिमी घाट में अवैध ट्रेकिंग और गोपनीय पर्यटन स्थलों की खोज एक गंभीर समस्या बन गई है। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले ये 'छिपे हुए स्थान' अब बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं, जिससे पर्यावरण विशेषज्ञ और स्थानीय समुदाय गहरी चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

इस क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र अत्यंत नाजुक हैं और इन्हें संरक्षित वनस्पति तथा दुर्लभ प्रजातियों का आश्रय स्थल माना जाता है। पर्यटकों की अनियंत्रित भीड़ मिट्टी के कटाव, वनस्पति के विनाश और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में व्यवधान का कारण बन रही है। जलस्रोतों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस तरह की अनियंत्रित ट्रेकिंग गतिविधियों से पर्यावरण को स्थायी नुकसान हो सकता है। वे मानते हैं कि यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो इन क्षेत्रों की जैव विविधता और प्राकृतिक संपदा की पूरी तरह क्षति हो सकती है।

सरकार और वन विभाग से अब इन गतिविधियों पर कड़ा नियंत्रण लगाने और पर्यटकों के बीच जागरूकता बढ़ाने की मांग उठ रही है। विशेषज्ञ सुझाते हैं कि पर्यटन के लिए निर्धारित और पर्यावरण के अनुकूल मार्गों का विकास किया जाए तथा अवैध ट्रेकिंग को रोकने के लिए सख्त प्रवर्तन उपाय अपनाए जाएं।