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यूपी पुलिस में दरोगा बनने वाले 1700 सिपाहियों के सामने बॉन्ड का संकट
उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग ने दरोगा परीक्षा पास करने वाले 1700 सिपाहियों से प्रशिक्षण और वेतन के रूप में 7.34 लाख रुपये की वापसी की मांग की है। दो साल के बॉन्ड नियम का हवाला देते हुए विभाग जॉइनिंग से पहले नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेने पर जोर दे रहा है।
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उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में पदोन्नति के लिए चयनित सिपाहियों को एक अप्रत्याशित प्रशासनिक बाधा का सामना करना पड़ रहा है। दरोगा के पद के लिए परीक्षा पास करने वाले लगभग 1700 कर्मचारियों को विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षण और वेतन संबंधी भुगतान करने के लिए कहा जा रहा है।
विभाग के अनुसार, सिपाहियों ने अपनी प्रशिक्षण अवधि के दौरान विभाग की ओर से 7.34 लाख रुपये का खर्च उठाया है। अब विभाग दो साल के बॉन्ड नियम का हवाला देते हुए इस राशि की वापसी की मांग कर रहा है। यह शर्त उन कर्मचारियों पर लागू की जा रही है जो सितंबर के अंत में दरोगा के नए पद पर जॉइन करने वाले हैं।
यह नीति कई सिपाहियों के लिए आर्थिक संकट का कारण बनी है। इस मुद्दे को लेकर प्रभावित अधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की अपील की है। कर्मचारी पक्ष का तर्क है कि पदोन्नति के मामले में विभाग ही नियोक्ता बना रहता है, इसलिए ऐसी वापसी की मांग अनुचित है।
विभाग का रुख यह है कि बॉन्ड नियम के अनुसार कर्मचारियों को सेवा छोड़ने या बड़े पद पर जाने से पहले प्रशिक्षण लागत की वापसी करनी चाहिए। इस विवाद के समाधान के लिए अब राज्य प्रशासन से निर्देश की प्रतीक्षा की जा रही है।