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यूपीआई एमडीआर फैसला पूरी तरह पेशेवर, विदेशी दबाव नहीं: सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यूपीआई लेनदेन शुल्क संबंधी निर्णय सरकार पर बाहरी दबाव का परिणाम नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एमडीआर किसी प्रकार का कर नहीं है और सरकार को इससे कोई आय नहीं होगी।
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भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़े यूपीआई लेनदेन शुल्क के निर्णय पर विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि यह कदम पूरी तरह पेशेवर आधार पर लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी विदेशी दबाव या प्रभाव के तहत यह निर्णय नहीं लिया गया है।
सीतारमण ने विपक्ष के इस दावे को खारिज कर दिया कि सरकार विदेशी दबाव में झुकी है। उनके अनुसार, मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) संबंधी यह नीति राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि एमडीआई किसी भी रूप में कर नहीं है और इससे सरकार को कोई राजस्व प्राप्त नहीं होगा।
यह निर्णय डिजिटल भुगतान प्रणाली को मजबूत करने और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है। सीतारमण का मानना है कि यह कदम भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने में सहायक होगा। पॉलिसी निर्माण के दौरान सभी हितधारकों के विचारों पर विचार किया गया था।