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यूपीआई एमडीआर रोलआउट स्थगित हो सकता है, व्यापारी संगठन मांग कर रहे हैं
भारतीय व्यापारी संगठन यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट की अक्टूबर 15 की शुरुआत को त्योहारी सीजन के बाद या आने वाले साल की शुरुआत में स्थगित करने की मांग कर रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि इस समय यह कदम बाजार के लिए अनुकूल नहीं है।
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भारतीय व्यापारी संगठनों ने यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लागू करने की योजना में देरी की मांग की है। ये समूह कहते हैं कि 15 अक्टूबर की निर्धारित तारीख को स्थगित करके इसे दिवाली के बाद या 2025 की शुरुआत में लाया जाए।
व्यापारी समुदाय का तर्क है कि त्योहारी मौसम खरीदारी का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है और इसी दौरान नया शुल्क लागू करने से छोटे व्यापारियों पर अनावश्यक दबाव पड़ेगा। यूपीआई माध्यम से होने वाले लेनदेन की लागत बढ़ने से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के सरकार के लक्ष्य को भी नुकसान हो सकता है।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के व्यापारी एकजुट होकर इस विलंबन के लिए आवेदन कर रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ महीनों की और देरी से बाजार को नई व्यवस्था के अनुकूल ढलने का समय मिल जाएगा।
फिलहाल स्पष्ट नहीं है कि नियामक प्राधिकारी इन अनुरोधों पर क्या निर्णय लेंगे। व्यापारी समूहों की ओर से औपचारिक रूप से अपने विचार प्रस्तुत किए जाने की उम्मीद है।