Business · India Bureau
यूपीआई व्यापारी शुल्क पर विभाजित हैं व्यावसायिक समुदाय
नए यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर खुदरा विक्रेताओं की चिंता बढ़ी है, जबकि तेज डिलीवरी सेवाएं इसके सीमित असर की उम्मीद जता रही हैं। अधिकांश लेनदेन 2,000 रुपये की सीमा के नीचे रहने से इस क्षेत्र पर न्यून प्रभाव पड़ने की संभावना है।
LSN India ·

यूपीआई पर नए व्यापारी शुल्क को लेकर भारत की कारोबारी दुनिया में मतभेद सामने आया है। जहां थोक व्यापारी और खुदरा विक्रेता इस कदम से गंभीर रूप से प्रभावित होने की चिंता जता रहे हैं, वहीं तेज डिलीवरी और ई-कॉमर्स क्षेत्र इसके प्रभाव को सीमित मान रहे हैं।
वितरणकर्ताओं ने व्यक्त की गई चिंताओं के अनुसार, नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट उनके मार्जिन को कम करेंगे और परिचालन लागत में वृद्धि करेंगे। खासकर छोटे व्यापारियों और स्ट्रीट विक्रेताओं के लिए यह भार काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। हालांकि, इस शुल्क संरचना में एक महत्वपूर्ण छूट प्रावधान है - 2,000 रुपये तक के लेनदेन शुल्क मुक्त हैं।
इसी कारण तेज डिलीवरी सेवा प्रदाता और ई-कॉमर्स कंपनियां इसके प्रभाव को सीमित बता रही हैं। इन प्लेटफॉर्मों पर अधिकांश लेनदेन 2,000 रुपये की निर्धारित सीमा से नीचे रहते हैं, जिससे उन पर शुल्क का भार न्यून रहेगा। ये कंपनियां मानती हैं कि उनका व्यावसायिक मॉडल इस बदलाव को आसानी से अवशोषित कर सकता है।
इस नीति के विभिन्न पहलुओं को लेकर आने वाले दिनों में व्यापारिक निकायों की ओर से और गहरी प्रतिक्रिया सामने आने की संभावना है। सरकार की ओर से इस निर्णय के पीछे डिजिटल भुगतान नेटवर्क को सुदृढ़ करने का उद्देश्य रहा है।