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यूपीआई शुल्क से उद्योग को समर्थन, लेकिन व्यापारियों को लागत की चिंता

भुगतान उद्योग ने यूपीआई पर 0.4 प्रतिशत शुल्क का समर्थन किया है, जो सालाना 20,600 करोड़ रुपये तक जमा कर सकता है। हालांकि, खुदरा विक्रेता और ईंधन डीलर मुनाफे में कमी और नकद लेनदेन की ओर बढ़ने की संभावना को लेकर आशंकित हैं।

LSN India · 18 September 2026

यूपीआई शुल्क से उद्योग को समर्थन, लेकिन व्यापारियों को लागत की चिंता

भारतीय भुगतान उद्योग ने दो हजार रुपये से अधिक की यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लागू करने का समर्थन किया है। इस कदम से वार्षिक आधार पर 20,600 करोड़ रुपये तक राजस्व जनरेट होने की संभावना है, जो डिजिटल भुगतान प्रणाली को सशक्त करने में मदद कर सकता है।

हालांकि, खुदरा व्यापारियों और ईंधन पंप संचालकों के बीच इस नीति को लेकर गहरी चिंता है। उनका कहना है कि यह अतिरिक्त शुल्क उनके पहले से ही दबे हुए मार्जिन को और कमजोर करेगा और परिचालन लागत में वृद्धि करेगा।

व्यापार प्रतिनिधियों का अनुमान है कि यह शुल्क ग्राहकों को नकद लेनदेन की ओर लौटने के लिए प्रेरित कर सकता है, जिससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों को नुकसान हो सकता है। छोटे दुकानदार और ईंधन विक्रेताओं के लिए, यह शुल्क उनके व्यवसायिक मॉडल पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

उद्योग विश्लेषकों का विचार है कि इस नीति के प्रभाव को कम करने के लिए छोटे व्यापारियों के लिए विशेष छूट या सहायता उपाय की आवश्यकता हो सकती है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि बाजार इस परिवर्तन को कैसे अपनाता है और क्या नकद लेनदेन में वृद्धि देखी जाएगी।