World · India Bureau
यूपीआई व्यापारियों के लिए एक लाख रुपये की सीमा: कब बदलेगा नियम?
भारत में छोटे यूपीआई व्यापारियों के लिए नए एमडीआर नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव आने वाले हैं। महीने में एक लाख रुपये तक की सीमा में रहने वाले व्यापारी अभी नई व्यवस्था से बाहर हैं, लेकिन बार-बार नियमों का उल्लंघन उन्हें पी2एम श्रेणी में डाल सकता है।
LSN India ·

डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म पर छोटे व्यापारियों की स्थिति को लेकर नई अस्पष्टता उभरी है। भारतीय नियामकों ने यूपीआई क्यूआर कोड के माध्यम से हर महीने एक लाख रुपये तक का लेनदेन करने वाले व्यापारियों को छोटे व्यापारी के रूप में परिभाषित किया है। ये व्यापारी वर्तमान में नई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) व्यवस्था के दायरे से बाहर रहते हैं।
हालांकि, इस छूट की अवधि सीमित प्रतीत होती है। यदि कोई छोटा व्यापारी बार-बार नियंत्रक दिशानिर्देशों का उल्लंघन करता है, तो उसे पी2एम (पेमेंट टू मर्चेंट) श्रेणी में स्थानांतरित किया जा सकता है। इससे उन्हें पूरी एमडीआर व्यवस्था के तहत आना पड़ेगा।
यह कदम छोटे व्यापारियों और बड़े खिलाड़ियों के बीच सीमांकन को स्पष्ट करने के लिए प्रतीत होता है। नियामकों का इरादा ऐसे व्यापारियों को निरुत्साहित करना है जो अपनी श्रेणी की सीमाओं का फायदा उठाकर नियमों को चकमा देने का प्रयास करें।
डिजिटल भुगतान क्षेत्र में हाल के महीनों में कई सुधार किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा करना है, साथ ही सुनिश्चित करना है कि बड़ी संस्थाएं अनुचित लाभ न ले सकें।