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UPSC का शताब्दी वर्ष: भारतीय परीक्षा के लिए ब्रिटेन से पहले ही संघर्ष
भारतीय संघ लोक सेवा आयोग अपने 100 वर्ष पूरे करने जा रहा है। इस यात्रा में भारतीयों ने कांग्रेस के जन्म से भी पहले ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध परीक्षा प्रणाली के लिए संघर्ष किया था।
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भारतीय संघ लोक सेवा आयोग की स्थापना के सौ साल के इतिहास में एक दिलचस्प पहलू यह है कि भारतीय समाज ने ब्रिटिश शासकों से परीक्षा के माध्यम से सेवा प्राप्त करने का अधिकार मांगा था, यह वह समय था जब राष्ट्रीय राजनीतिक गतिविधियां अभी अपने आरंभिक चरण में थीं।
भारतीय प्रशासनिक सेवा और अन्य सरकारी पदों के लिए परीक्षा आयोजित करने की पद्धति को लेकर भारतीय जनता और समाज सुधारकों का एक लंबा संघर्ष रहा। प्रारंभिक दौर में भारतीयों को सरकारी नौकरियों में भेदभाव का सामना करना पड़ता था, लेकिन निरंतर दबाव के कारण औपनिवेशिक सत्ता को एक निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली स्थापित करनी पड़ी।
आयोग की स्थापना के बाद से भारत के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण परिवर्तन आए हैं। आजादी के बाद भारतीय संविधान में UPSC को एक महत्वपूर्ण संस्था के रूप में मान्यता दी गई और यह राष्ट्रीय सेवाओं के लिए प्रतिभा चयन का प्रमुख माध्यम बन गया।
वर्तमान समय में UPSC का परीक्षा मॉडल भारतीय लोकतंत्र की मेरिटोक्रेसी का प्रतीक माना जाता है। इसके माध्यम से देश भर से लाखों अभ्यर्थी प्रतिवर्ष सेवाओं के लिए आवेदन करते हैं और सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा का चयन सुनिश्चित किया जाता है।