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शहरी नियोजन में सुधार जरूरी, कुत्तों की बड़े पैमाने पर हत्या नहीं
भारत के कई शहरी इलाकों में कुत्तों की आबादी में तेजी से वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या सरकार की अक्षमता और खराब कचरा प्रबंधन व्यवस्था का परिणाम है।
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देश के प्रमुख शहरी केंद्रों में आवारा कुत्तों की संख्या में चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है। इस समस्या के समाधान के लिए विशेषज्ञ बड़े पैमाने पर पशु संहार के बजाय बेहतर शहरी नियोजन पर जोर दे रहे हैं।
शहरों में कुत्तों की आबादी बढ़ने का मुख्य कारण अपर्याप्त कचरा प्रबंधन व्यवस्था है। जहां खुले में कचरा फेंका जाता है और सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं होती, वहां इन जानवरों को भोजन आसानी से मिल जाता है, जिससे उनकी संख्या में तेजी से वृद्धि होती है।
नगर निकायों और राज्य सरकारों को सुव्यवस्थित कचरा संग्रहण, प्रसंस्करण और निपटान की व्यवस्था में निवेश करने की तत्काल आवश्यकता है। इसके साथ ही, जनता को भी सफाई के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए ताकि सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फेंका जाए।
पशु कल्याण संगठनों का तर्क है कि बड़े पैमाने पर कुत्तों की हत्या न केवल नैतिक दृष्टि से गलत है, बल्कि इससे समस्या का स्थायी समाधान भी नहीं होता। इसके बजाय, स्थायी समाधान के लिए मजबूत शहरी बुनियादी ढांचा और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था ही कारगर साबित हो सकती है।