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भारत समेत विकासशील देशों को AI नीति तय करने में कोई भूमिका नहीं: अमेरिका-चीन होड़
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास में अमेरिका और चीन की प्रतिस्पर्धा विश्व स्तर पर शासन और सुरक्षा के सवालों को जटिल बना रही है। इससे बाकी देशों को इस तकनीक के नियमन में कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं मिल पा रही।
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दोनों महाशक्तियों की AI में प्रभुत्व की होड़ विश्वव्यापी शासन ढांचे को एक गंभीर चुनौती का सामना करा रही है। अमेरिका और चीन तकनीकी विकास की गति तेज करने पर केंद्रित हैं, जिससे सुरक्षा और नैतिक मुद्दों पर व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाना मुश्किल हो गया है।
भारत और अन्य विकासशील देशों को यह चिंता है कि AI नीति निर्माण की प्रक्रिया में उन्हें कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं दी जा रही है। जबकि ये देश इस तकनीक से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले हैं, वैश्विक मंचों पर उनकी आवाज दबी रह जाती है। अमेरिकी और चीनी कंपनियों के प्रभुत्व के कारण विश्वव्यापी नियमन के लिए एक समान ढांचा तैयार करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक विकसित और विकासशील देश AI के विकास और नियमन पर संवाद नहीं करते, तब तक वैश्विक स्तर पर कोई प्रभावी नीति नहीं बन सकेगी। सुरक्षा, गोपनीयता और डेटा सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर एकीकृत दृष्टिकोण की जरूरत है।