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अमेरिकी अदालत ने अफगान शरणार्थियों के निर्वासन पर रोक लगाई
न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत ने ट्रम्प प्रशासन की अफगानिस्तान से आए नागरिकों को वापस भेजने की योजना पर अस्थायी रोक लगाई है। न्यायाधीश ने चेतावनी दी है कि निर्वासित लोगों को जानलेवा खतरों का सामना करना पड़ सकता है।
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न्यूयॉर्क की संघीय अदालत में न्यायाधीश वेलेरी कैप्रोनी ने मंगलवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन द्वारा अमेरिका में कैद अफगान नागरिकों को अफगानिस्तान या पाकिस्तान भेजने की योजना पर रोक लगाई है। यह आदेश शनिवार तक प्रभावी रहेगा और इस अवधि में कोई निर्वासन नहीं होगा।
इस कदम के खिलाफ प्रवासी अधिकार संगठनों और कांग्रेस के सदस्यों की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई है। कैलिफोर्निया के डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि स्कॉट पीटर्स की अगुआई में सीनेट और हाउस के 65 सदस्यों ने एक पत्र भेजा था। इस पत्र में चेतावनी दी गई थी कि असुरक्षित लोगों को भेजने से वे "उत्पीड़न, यातना या मृत्यु" का शिकार हो सकते हैं। यह पत्र सोमवार को विदेश सचिव मार्को रूबियो और गृह सुरक्षा सचिव मार्कवेन मुलिन को भेजा गया था।
मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि निर्वासित किए गए व्यक्तियों को तालिबान से प्रतिशोध का सामना करना पड़ सकता है। अफगानिस्तान से हजारों नागरिक अमेरिकी सेना और सहायता संगठनों के साथ काम करने के कारण उत्पीड़न और जानलेवा खतरों से बचकर अमेरिका आए थे।
न्यायालय के समक्ष सरकार के वकील मामले को प्रस्तुत करने के बीच यह अस्थायी रोक जारी की गई है।