Business · India Bureau
भारत में अमेरिकी तेल-गैस आपूर्ति में 43% की गिरावट
पश्चिमी एशिया से आयात बढ़ने के साथ ही भारतीय रिफाइनरियां अमेरिकी तेल की जगह मध्य पूर्व और रूसी विकल्पों को प्राथमिकता दे रही हैं। ऊंची शिपिंग लागत और सीमित आपूर्ति अमेरिकी कच्चे तेल को कम आकर्षक बना रही है।
LSN India ·

भारत में अमेरिकी तेल और गैस की आपूर्ति में भारी गिरावट आई है। देश की रिफाइनरियां अब अमेरिकी कच्चे तेल के बजाय पश्चिमी एशिया और रूस से आयात करना ज्यादा लाभकारी मान रही हैं। इस बदलाव से अमेरिकी आपूर्ति में 43 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों के लिए अमेरिकी कच्चे तेल कम आकर्षक होने के पीछे कई कारण हैं। लंबी दूरी की शिपिंग के कारण भाड़े की लागत अधिक आती है। इसके अलावा, लंबी समुद्री यात्रा और मध्यम सल्फर युक्त कच्चे तेल की सीमित आपूर्ति भी प्रमुख कारण है। इन सभी कारकों के मिलने से अमेरिकी विकल्प आर्थिक दृष्टि से कम व्यवहारिक हो गया है।
पश्चिमी एशिया के देशों और रूस से आयातित कच्चे तेल की कीमत अधिक प्रतिस्पर्धी है और शिपिंग लागत भी कम है। ये देश माध्यम सल्फर युक्त कच्चे तेल की बेहतर उपलब्धता भी सुनिश्चित करते हैं। इसी कारण से भारतीय तेल रिफाइनरियां अपने आयात का आधार अब अधिकतर इन्हीं क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित कर रही हैं।
भारतीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए यह बदलाव वैश्विक ऊर्जा व्यापार की गतिशीलता को दर्शाता है। भौगोलिक समीपता और आर्थिक व्यवहार्यता अब देशों के बीच व्यापार के प्रमुख निर्धारक बनते जा रहे हैं। आने वाले समय में भारत के ऊर्जा आयात का पैटर्न इन्हीं सिद्धांतों पर आधारित रहने की संभावना है।