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भारत-चीन पर प्रतिबंध लगाने के लिए यूरोप से अनुरोध करता था अमेरिका
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने खुलासा किया कि वाशिंगटन ने यूरोपीय देशों से रूसी तेल खरीद को लेकर भारत और चीन पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया था। हालांकि, यूरोपीय सहयोगियों ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।
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अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अमेरिका की कूटनीतिक रणनीति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने लाता है। बेसेंट के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने यूरोपीय भागीदारों से मांग की थी कि वे रूसी तेल के आयात के संबंध में भारत और चीन पर प्रतिबंध लगाएं। यह कदम माना जाता है कि रूस को तेल निर्यात के माध्यम से मिलने वाले राजस्व को कम करने के लिए था।
हालांकि, यूरोपीय देशों ने अमेरिकी प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। यूरोप ने भारत और चीन के विरुद्ध ऐसे प्रतिबंध लागू करने से इनकार किया, जिससे स्पष्ट होता है कि पश्चिमी सहयोगियों के बीच एकता की कमी है। इस निर्णय से संकेत मिलता है कि यूरोपीय देश अमेरिकी नीति के साथ पूरी तरह तालमेल बनाए रखने में असमर्थ या अनिच्छुक हैं।
यह घटना भारत और चीन जैसे एशियाई शक्तियों के संदर्भ में पश्चिमी राजनीति में विभाजन को दर्शाती है। अमेरिका द्वारा किए गए प्रयास के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों और राजनीतिक हितों के कारण यूरोप अपनी स्वतंत्र नीति अपनाना जारी रखे हुए है। यह घटना बहुपक्षीय वैश्विक राजनीति में जटिलताओं को उजागर करती है।