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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में देरी: जयशंकर ने दी व्याख्या
नई दिल्ली और वाशिंगटन ने फरवरी में द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के ढांचे को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी। हालांकि, अमेरिकी टैरिफ नीति में बदलाव ने इस समझौते को जटिल बना दिया है।
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भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में आ रही देरी के कारणों को स्पष्ट किया है। उन्होंने बताया कि फरवरी में घोषित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के ढांचे को अंतिम रूप देने के बाद अमेरिकी टैरिफ परिदृश्य में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं।
जयशंकर के अनुसार, वाशिंगटन की तरफ से टैरिफ नीति में किए गए बदलाव समझौते को आगे बढ़ाने में बाधा बन गए हैं। यह स्थिति दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता को अधिक जटिल बना दी है। भारत सरकार इस मुद्दे को सुलझाने के लिए अमेरिका के साथ निरंतर संवाद में लगी हुई है।
द्विपक्षीय व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस समझौते से भारतीय निर्यातकों, विशेषकर कृषि और सेवा क्षेत्र में, को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन की बदलती नीति के कारण वार्ता की गति धीमी हो गई है।
भारतीय पक्ष इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि दोनों देश एक संतुलित और परस्पर लाभकारी व्यापार समझौता तक पहुंचें। राजनयिकों के अनुसार, इस समझौते पर पुनः विचार और संशोधन की प्रक्रिया चल रही है ताकि बदली हुई परिस्थितियों के अनुसार इसे तैयार किया जा सके।