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तेल की कीमतों और दर बढ़ने की आशंकाओं से अमेरिकी बांड पर दबाव बढ़ा
वैश्विक बांड बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ने से अमेरिकी 10 साल के बांडों पर यील्ड 5 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है। तेल की कीमतों में उछाल और ब्याज दरों में संभावित वृद्धि की आशंकाएं इस गिरावट का मुख्य कारण बन गई हैं।
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वैश्विक बांड बाजार में व्यापक बिकवाली का दबाव बढ़ने से अमेरिकी सरकारी बांडों की यील्ड कई सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। 10 साल की परिपक्वता वाले बांडों की यील्ड 5 प्रतिशत के ऐतिहासिक स्तर की ओर बढ़ रही है, जो बाजार में बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है।
तेल की कीमतों में तेजी बांड बाजार पर दबाव का एक प्रमुख कारण बन गई है। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें मुद्रास्फीति की आशंकाओं को बढ़ाती हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में आगे की बढ़ोतरी की संभावना बढ़ जाती है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना से निवेशक बांड जैसी निश्चित आय वाली संपत्तियों से पैसा निकाल रहे हैं।
वैश्विक बाजारों में इस बिकवाली का असर एशिया-प्रशांत क्षेत्र सहित अन्य भागों में भी देखा जा रहा है। उभरती अर्थव्यवस्थाएं विशेष रूप से इस बदलाव के प्रति संवेदनशील हैं, क्योंकि अमेरिकी दरों में वृद्धि से पूंजी पलायन की आशंका बढ़ती है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में मुद्रास्फीति के आंकड़े और केंद्रीय बैंकों की नीतिगत घोषणाएं बांड बाजार की दिशा तय करेंगी। निवेशकों की नजरें अब अर्थव्यवस्था की गति को दर्शाने वाले आर्थिक संकेतकों पर केंद्रित हैं।