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झील के ठंडे पानी से परिसर को ठंडा करने वाली कॉर्नेल विश्वविद्यालय की अनोखी पहल
कॉर्नेल विश्वविद्यालय ने कयुगा झील से 250 फीट गहराई से पानी निकालकर अपने परिसर को ठंडा करने की एक क्रांतिकारी प्रणाली विकसित की है। इस पर्यावरण अनुकूल पद्धति से विश्वविद्यालय की वार्षिक ऊर्जा खपत में 85 प्रतिशत की कमी आई है।
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अमेरिकी विश्वविद्यालय कॉर्नेल ने सतत विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया है। वर्ष 2000 में शुरू की गई इस झील स्रोत शीतलन प्रणाली विश्वविद्यालय के परिसर की सभी शीतलन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिजाइन की गई थी। 1999 में निर्माण कार्य शुरू होने के बाद, यह प्रणाली 2000 तक पूरी तरह कार्यशील हो गई।
कयुगा झील की गहराइयों से निकाले गए अत्यंत ठंडे पानी का उपयोग करके, विश्वविद्यालय ने परंपरागत वातानुकूलन प्रणालियों पर अपनी निर्भरता को काफी हद तक कम कर दिया। यह तकनीकी समाधान विश्वविद्यालय के विशाल परिसर में हजारों इमारतों की ऊष्मा को नियंत्रित करने में सफल साबित हुआ।
इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम विश्वविद्यालय की वार्षिक ऊर्जा खपत में 85 प्रतिशत की असाधारण कमी रही है। यह कमी न केवल परिसर के संचालन को अधिक किफायती बनाती है, बल्कि पर्यावरणीय प्रदूषण में भी उल्लेखनीय कमी लाती है।
कॉर्नेल विश्वविद्यालय की यह पहल विश्वभर के शैक्षणिक संस्थानों के लिए पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकी अपनाने का एक प्रेरक उदाहरण बन गई है। इस प्रकार की पहल भविष्य में अन्य संस्थानों को भी टिकाऊ समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।