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भारतीय मूल के निवेशक का दावा: ग्रीन कार्ड में फंसे भारतीयों की वापसी से जीडीपी बढ़ सकती है
अमेरिका में H-1B वीजा के तहत काम करने वाले भारतीय पेशेवरों का एक बड़ा हिस्सा ग्रीन कार्ड के लंबे इंतजार में फंसा है। एक प्रभावशाली निवेशक का मानना है कि यदि इनमें से महज 10 प्रतिशत लोग भारत लौटें तो देश की जीडीपी में एक प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है।
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अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के एक निवेशक ने भारतीय प्रतिभा के पलायन और उसके संभावित आर्थिक प्रभाव के बारे में एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार, अमेरिका में H-1B वीजा धारकों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में होने वाली देरी भारत के लिए एक अवसर का द्वार खोल सकती है।
ग्रीन कार्ड के लिए लंबी प्रतीक्षा सूची में फंसे भारतीय पेशेवर अक्सर अनिश्चितता और निराशा का सामना करते हैं। ये प्रतिभाएं तकनीकी क्षेत्र, प्रबंधन और अन्य उच्च-कौशल वाले क्षेत्रों में काम कर रही हैं। निवेशक का तर्क है कि यदि इस समूह का केवल 10 प्रतिशत हिस्सा भारत लौटने का फैसला करे तो इससे देश की अर्थव्यवस्था को काफी लाभ हो सकता है।
भारत में इन प्रवासी पेशेवरों की वापसी से स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिल सकती है, नई तकनीकें आ सकती हैं और बेरोजगारी में कमी आ सकती है। ये विदेश में कमाई का अनुभव लेकर आएंगे और भारतीय उद्यमिता को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।
यह विश्लेषण भारत-प्रवासी संबंधों और प्रतिभा प्रबंधन की नीतियों पर सवाल उठाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत सरकार इन पेशेवरों के लिए आकर्षक नीतियां और निवेश के अवसर बनाए तो देश की आर्थिक वृद्धि को गति मिल सकती है।