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इराक से अमेरिकी सैनिकों की पूर्ण वापसी, डेढ़ दशक का सैन्य अभियान समाप्त
संयुक्त राज्य अमेरिका ने इराक से अपनी सेना की संपूर्ण तैनाती समाप्त कर दी है, जिससे चरमपंथ विरोधी 12 साल के मिशन का अंत हुआ है। देश के नेतृत्व ने इस कदम को अलग-अलग नजरिए से देखा है।
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अमेरिकी सशस्त्र बलों की अंतिम टुकड़ी इराक के उत्तरी क्षेत्र स्थित इरबिल हवाई अड्डे से प्रस्थान कर चुकी है, जिससे इस्लामिक स्टेट के विरुद्ध संचालित दीर्घकालीन सैन्य कार्यवाही का समापन हुआ है। यह वापसी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और सैन्य मोड़ को चिह्नित करती है, जो 2011 में शुरू हुए अभियान को औपचारिक रूप से समाप्त करती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति प्रशासन ने इस पदक्षेप को एक बड़ी सैन्य सफलता के रूप में प्रस्तुत किया है। वाशिंगटन का तर्क है कि इराक में अमेरिकी सेना की मौजूदगी अब आवश्यक नहीं रह गई है क्योंकि इस्लामिक स्टेट की शक्ति में काफी कमी आ गई है।
इराकी प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने इस घटनाक्रम को अपने देश की संप्रभुता के लिए एक नया अध्याय माना है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय इराक की राजनीतिक और सैन्य आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। बगदाद की ओर से व्यक्त यह दृष्टिकोण अमेरिकी दृष्टिकोण से भिन्न है, लेकिन दोनों पक्ष इराक में सुरक्षा स्थिति में सुधार की बात मानते हैं।
यह पूर्ण सैन्य वापसी इराक क्षेत्र में राजनीतिक और सुरक्षा परिस्थितियों में आए बदलाव का संकेत है, हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास जारी रहने होंगे।