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गाड़ियों की माइलेज: क्यों खरीदार राउंड नंबर से कम दूरी वाली कारों के लिए ज्यादा देते हैं
एक नए अध्ययन से पता चला है कि इस्तेमाल की गई कारों की बिक्री में डीलर्स खरीदारों के 'लेफ्ट डिजिट बायस' का फायदा उठाते हैं। लाखों लेनदेन के विश्लेषण में पाया गया कि खरीदार माइलेज के पहले अंक पर ध्यान देते हैं, जबकि बाकी संख्याओं को नजरअंदाज कर देते हैं।
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भारत सहित विभिन्न बाजारों में इस्तेमाल की गई कारों की खरीद-बिक्री में एक दिलचस्प पैटर्न सामने आया है। शोधकर्ताओं ने लाखों गाड़ियों के लेनदेन का विश्लेषण करके पाया कि डीलर्स माइलेज से संबंधित खरीदारों के मनोवैज्ञानिक झुकाव का लाभ उठा रहे हैं।
अध्ययन में यह बात सामने आई कि खरीदार गाड़ी की माइलेज देखते समय पहले अंक पर अधिक ध्यान देते हैं। उदाहरण के लिए, 99,999 किलोमीटर वाली गाड़ी और 1,00,000 किलोमीटर वाली गाड़ी में सिर्फ एक हजार किलोमीटर का अंतर होता है, लेकिन खरीदार पहली गाड़ी को बेहतर मानते हैं क्योंकि उसका पहला अंक कम है।
इसी मनोविज्ञान का इस्तेमाल करते हुए डीलर्स उन गाड़ियों के लिए अधिक कीमत वसूल करते हैं जिनकी माइलेज राउंड नंबर से ठीक नीचे होती है। खरीदार इस बारीक अंतर को नजरअंदाज कर देते हैं और गाड़ी के वास्तविक मूल्य से अधिक कीमत चुकाते हैं। शोध से पता चलता है कि यह प्रवृत्ति, जिसे 'लेफ्ट डिजिट बायस' कहा जाता है, बाजार में काफी प्रभावशाली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अध्ययन उपभोक्ताओं को अधिक सचेत रहने की जरूरत की ओर इशारा करता है। गाड़ी खरीदते समय केवल माइलेज का पहला अंक नहीं, बल्कि सभी आंकड़ों पर विचार करना चाहिए और वास्तविक कीमत का आकलन करना चाहिए।