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उत्तराखंड में ग्लेशियल झीलों की निगरानी के लिए उच्च तकनीकी व्यवस्था शुरू
हिमालयी ग्लेशियल झीलों से आने वाले अचानक बाढ़ के खतरे को रोकने के लिए उत्तराखंड सरकार ने वसुंधरा ताल में रियल टाइम मॉनिटरिंग और अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करना शुरू किया है।
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उत्तराखंड में ग्लेशियल झीलों से उत्पन्न होने वाले ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के जोखिम को कम करने की दिशा में सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हिमालयी क्षेत्र में स्थित इन झीलों में अचानक जलस्तर में वृद्धि या झील के टूटने से घाटियों में विनाशकारी बाढ़ आने का खतरा बना रहता है।
इस समस्या से निपटने के लिए राज्य ने वसुंधरा ताल से शुरुआत करते हुए आधुनिक प्रযुक्ति आधारित निगरानी व्यवस्था का संचालन शुरू किया है। रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम से झीलों के जलस्तर, तापमान और अन्य महत्वपूर्ण मापदंडों की लगातार जांच की जा सकेगी।
अर्ली वार्निंग सिस्टम के जरिए किसी भी असामान्य परिवर्तन की सूचना तुरंत स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन प्रबंधन विभाग को दी जा सकेगी। इससे समय पर निकासी और सुरक्षा उपायों में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय में ग्लेशियल झीलें बेहद संवेदनशील हो गई हैं। ऐसे में तकनीकी निगरानी व्यवस्था न केवल जनजीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि आपदा प्रबंधन में भी सहायक साबित होगी।