LSN News › India

World · India Bureau

वंदे मातरम् का गायन हो राष्ट्रीय एकता का प्रतीक

राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के प्रस्तुतिकरण में भारत की विविधता को सम्मान देते हुए एकता का संदेश दिया जाना चाहिए। विभिन्न सांस्कृतिक और भाषायी पृष्ठभूमि के लोगों को शामिल करते हुए इसका प्रदर्शन किया जाना जरूरी है।

LSN India · 24 September 2026

वंदे मातरम् का गायन हो राष्ट्रीय एकता का प्रतीक

देश के विभिन्न हिस्सों में वंदे मातरम् के प्रदर्शन को लेकर बहस तेज हो गई है। राष्ट्रगीत के सही और सार्थक गायन के बारे में विशेषज्ञ और सांस्कृतिक कार्यकर्ता सुझाव दे रहे हैं कि इसे राष्ट्रीय भावना के साथ प्रस्तुत किया जाए।

वंदे मातरम् का गायन परंपरागत तरीके से किए जाने की बजाय आधुनिक संदर्भों में प्रासंगिक बनाने का सुझाव दिया जा रहा है। समाज के विभिन्न वर्गों और समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए इस राष्ट्रगीत को प्रस्तुत करने पर जोर दिया जा रहा है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की शक्ति इसकी विविधता में निहित है। इसी कारण वंदे मातरम् का प्रदर्शन भी इसी भावना को प्रतिबिंबित करना चाहिए। अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं से आने वाले लोगों का समान सम्मान और प्रतिनिधित्व इस राष्ट्रगीत के पाठ में परिलक्षित होना चाहिए।

राष्ट्रीय एकता का संदेश देते हुए वंदे मातरम् को गाने का यह दृष्टिकोण देश की बहुलतावादी परंपरा को मजबूत करने में मदद कर सकता है। सभी नागरिकों को समान रूप से शामिल करते हुए राष्ट्रगीत का गायन भारतीय लोकतंत्र की मूल भावना को संजोए रखने का एक प्रभावी तरीका माना जा रहा है।