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वाराणसी की मलइयो: ओस और दूध से बनी परंपरागत मिठाई जो विदेशों को आकर्षित कर रही है

वाराणसी की प्रसिद्ध मलइयो अपनी अद्वितीय निर्माण प्रक्रिया के लिए विश्व भर में पहचानी जाती है। इस पारंपरिक मिठाई को बनाने के लिए ओस और दूध के झाग का उपयोग किया जाता है, जो विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहा है।

LSN India · 18 August 2026

वाराणसी की मलइयो: ओस और दूध से बनी परंपरागत मिठाई जो विदेशों को आकर्षित कर रही है

वाराणसी की मलइयो अपनी खास तैयारी प्रक्रिया के कारण देश-विदेश में प्रसिद्ध है। इस पारंपरिक मिठाई को बनाने का तरीका पीढ़ियों से चला आ रहा है और इसकी खासियत इसके प्राचीन निर्माण तरीके में ही निहित है।

मलइयो तैयार करने की प्रक्रिया सर्द रातों में शुरू होती है। दूध को खुले आसमान के नीचे रखा जाता है ताकि वह ओस से भिगोया जा सके। रातभर ठंडी हवा और ओस का असर दूध पर पड़ता है, जिससे दूध की सतह पर एक विशेष प्रकार का झाग बनता है।

अगली सुबह तैयार हुए दूध के इसी झाग को बड़ी मथनी से सावधानीपूर्वक फेंटा जाता है। इस प्रक्रिया के बाद इसमें चीनी, केसर, इलायची, पिस्ता और बादाम जैसे मेवे मिलाए जाते हैं। इन सभी सामग्रियों का संयोजन मलइयो को इसका विशिष्ट स्वाद और बनावट देता है।

यह अनोखी मिठाई अब केवल भारतीय पर्यटकों का ही नहीं बल्कि विदेशी आगंतुकों का भी पसंदीदा बन गई है। वाराणसी आने वाले सैलानी इस परंपरागत मिठाई का स्वाद चखने के लिए विशेष रुचि दिखाते हैं। प्राचीन विधि से बनी मलइयो भारतीय संस्कृति और पाक कला की समृद्ध विरासत का प्रतीक बनी हुई है।