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घर के मुख्य द्वार पर देवताओं की प्रतिमा: वास्तु के नियम और दिशानिर्देश
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के प्रवेश द्वार पर देवताओं की मूर्तियां रखना अत्यंत शुभ माना जाता है। गणेश, मां लक्ष्मी और कुबेर की प्रतिमा स्थापित करने के समय विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक है।
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वास्तु विज्ञान के अनुसार घर का मुख्य द्वार समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना जाता है। इसी कारण इस स्थान पर देवताओं की प्रतिमाओं को स्थापित करना परंपरागत रूप से प्रचलित है। वास्तु के नियमों का सही ढंग से पालन करने से घर में शांति, समृद्धि और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
गणेश जी की प्रतिमा मुख्य द्वार पर रखना विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार गणेश की मूर्ति द्वार के दाहिनी ओर या मध्य में स्थापित की जानी चाहिए। माना जाता है कि गणेश की पूजा से बाधाओं का निवारण होता है और व्यावसायिक सफलता प्राप्त होती है। मूर्ति को पवित्र और स्वच्छ रखना अत्यावश्यक है।
मां लक्ष्मी की प्रतिमा घर में धन और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। इसलिए कई परिवार अपने मुख्य द्वार के पास लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करते हैं। वास्तु के अनुसार लक्ष्मी की मूर्ति को द्वार के बाईं ओर या दीवार पर लगाया जा सकता है। यह माना जाता है कि लक्ष्मी की पूजा से आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
भगवान कुबेर को धन के देवता के रूप में माना जाता है। घर के मुख्य द्वार पर कुबेर की प्रतिमा लगाने से वित्तीय लाभ और आर्थिक वृद्धि होती है। वास्तु विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कुबेर की मूर्ति को उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करना सर्वोत्तम है। किसी भी देवता की प्रतिमा को नियमित रूप से साफ रखना चाहिए और उसके सामने दीपक जलाना शुभ माना जाता है।