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वास्तु नियमों के अनुसार घर में कुबेर प्रतिमा की सही दिशा और स्थापन
हिंदू धर्मशास्त्र में कुबेर को धन के देवता माना जाता है। वास्तु विज्ञान के अनुसार उनकी मूर्ति को घर के किस हिस्से में स्थापित करना चाहिए, इसके बारे में जानें।
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धनदाता कुबेर का घरों में विशेष महत्व रहा है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, कुबेर को उत्तर दिशा का अधिपति और देवताओं का कोषाध्यक्ष माना जाता है। इसी कारण उनकी प्रतिमा को घर में रखते समय दिशा का विशेष ध्यान रखा जाता है।
वास्तु विशेषज्ञों के मुताबिक, उत्तर दिशा जल तत्व से जुड़ी होती है और इसे आर्थिक गतिविधियों, व्यापार, नए व्यावसायिक अवसरों तथा आय के स्रोतों से सीधा संबंध माना जाता है। यही कारण है कि कुबेर की प्रतिमा को आवास के उत्तर या उत्तर-पूर्व भाग में स्थापित करने की परंपरा रही है।
धर्मशास्त्रों में कुबेर को संपत्ति और समृद्धि के रक्षक के रूप में वर्णित किया गया है। घर के मंदिर या पूजा स्थल में उनकी मूर्ति स्थापित करते समय पवित्रता और दिशा संबंधी नियमों का पालन किया जाता है। वास्तु के अनुसार सही दिशा में प्रतिमा रखने से आर्थिक समृद्धि और कल्याण में वृद्धि होती है।