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वाहन ऋण बढ़े, लेकिन आधे कर्जदारों पर 60 लाख का कर्ज
भारत के वाहन ऋण बाजार में बदलती प्रवृत्तियां दिखाई दे रही हैं। एक ही समय में कई ऋण लेने वाले, प्रयुक्त कार खरीद पर तेजी से बढ़ता वित्तपोषण और भुगतान में चूक के बढ़ते मामले चिंता का विषय बन गए हैं।
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भारत की वाहन ऋण व्यवस्था में जोखिम का प्रोफाइल तेजी से बदल रहा है। ताजा डेटा से पता चलता है कि लगभग आधे कर्जदार एक साथ 60 लाख रुपये से अधिक का कुल ऋण लिए हुए हैं। यह प्रवृत्ति उपभोक्ताओं के बीच बढ़ती आर्थिक दबाव और उधार क्षमता की सीमाओं का संकेत देती है।
एक ही समय में कई ऋण लेने के मामलों में भी वृद्धि देखी जा रही है। कर्जदार अलग-अलग वित्तीय संस्थानों से एक साथ कई ऋण ले रहे हैं, जिससे उनके कर्ज का बोझ और अधिक बढ़ गया है। यह बहु-ऋण प्रवृत्ति बैंकों और वित्तीय कंपनियों के लिए चूक का जोखिम बढ़ाती है।
प्रयुक्त वाहनों के वित्तपोषण में पिछले कुछ समय में तेजी से वृद्धि हुई है। नई कारों की तुलना में सस्ते विकल्प की ओर उपभोक्ताओं का रुझान बढ़ा है, लेकिन यह खंड अपेक्षाकृत कम पर्यवेक्षण और अधिक जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है। कुछ क्षेत्रों में ऋण चुकौती में चूक के मामलों में भी वृद्धि दर्ज की गई है।
वाहन ऋण बाजार में ये बदलाव नीति निर्माताओं और ऋणदाताओं दोनों के लिए सतर्कता का संकेत हैं। बढ़ते जोखिम को नियंत्रित करने के लिए अधिक कठोर मूल्यांकन मानदंड और उधार सीमाओं की आवश्यकता हो सकती है ताकि बाजार की स्थिरता बनी रहे।