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वेल्लोर की ऐतिहासिक मंडी: 156 साल बाद भी जीवंत परंपरा
वेल्लोर की थोक मंडी 1868 से लेकर आज तक का सफर तय करते हुए 700 स्थायी और 300 अस्थायी दुकानों का केंद्र बन गई है। बदलते समय में भी इस प्राचीन बाजार की पारंपरिक व्यावसायिक विरासत बरकरार है।
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तमिलनाडु के वेल्लोर में स्थित थोक मंडी दक्षिण भारत के सबसे पुराने व्यावसायिक केंद्रों में से एक है। 1868 में स्थापित इस बाजार की शुरुआत मात्र 200 दुकानों से हुई थी, लेकिन आज यह 700 से अधिक स्थायी दुकानों और 300 अस्थायी दुकानों का केंद्र बन गया है।
सदियों से चली आ रही परंपरागत व्यावसायिक प्रणाली के साथ आधुनिकता का मिश्रण इस मंडी की विशेषता है। यहां की गलियों में व्यापारियों और खरीदारों की भीड़ हर दिन देखी जाती है, जो इस स्थान के आर्थिक महत्व को दर्शाती है।
इस मंडी के पुरानी दुकानों के मालिक पीढ़ियों से यही व्यवसाय कर रहे हैं। उनके परिवार इसी जगह पर अपनी व्यावसायिक पहचान बनाए हुए हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आज भी जब आधुनिक खुदरा दुकानें तेजी से फैल रही हैं, तब भी वेल्लोर की यह थोक मंडी अपनी प्राचीन परंपरा को बनाए रखते हुए विकास की गति को बनाए हुए है। यह बाजार न केवल व्यावसायिक गतिविधियों का केंद्र है, बल्कि शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का भी प्रतीक है।