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रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व की बाघिन का इलाज सामान्य बगीचे की जड़ी-बूटी से
नौरादेही स्थित रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व की एक घायल बाघिन को जबलपुर के वन्यजीव और फोरेंसिक स्वास्थ्य विभाग में एक महीने से अधिक समय से उपचार प्राप्त हो रहा है। पशु चिकित्सकों ने इस खतरनाक वायरल रोग के इलाज के लिए परंपरागत बगीचे की जड़ी-बूटी का उपयोग करने का निर्णय लिया है।
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नौरादेही में रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व से बचाई गई बाघिन के उपचार में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। जबलपुर के स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ एंड फोरेंसिक हेल्थ में एक गंभीर वायरल बीमारी से जूझ रही इस बाघिन के इलाज के लिए पशु चिकित्सकों की टीम ने एक अलग रणनीति अपनाई है।
चिकित्सा दल ने इस संक्रामक रोग का मुकाबला करने के लिए आमतौर पर बागों में उगाई जाने वाली एक सामान्य जड़ी-बूटी का प्रयोग शुरू किया है। यह पारंपरिक दृष्टिकोण आधुनिक पशु चिकित्सा विज्ञान के साथ प्राचीन ज्ञान को जोड़ने का प्रयास दर्शाता है।
घायल बाघिन को एक माह से अधिक समय से सतत देखभाल और उपचार प्रदान किया जा रहा है। जबलपुर की इस सुविधा में वन्यजीवों के उपचार के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं हैं, जो इस तरह के संकटग्रस्त जानवरों को पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
यह घटना दर्शाती है कि कैसे संरक्षण प्रयास और आधुनिक पशु चिकित्सा सेवाएं भारत के लुप्तप्राय बाघों को जीवित रखने में कितनी महत्वपूर्ण हैं।