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वेंकैया नायडु ने तेलुगु साहित्य आलोचना में कट्टमांची के योगदान की प्रशंसा की
उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडु ने तेलुगु साहित्यिक आलोचना के क्षेत्र में कट्टमांची के महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकार किया है। नायडु ने साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में उनकी भूमिका की सराहना की है।
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उप-राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडु ने तेलुगु साहित्यिक आलोचना में प्रख्यात विद्वान कट्टमांची के गहन और व्यापक योगदान की प्रशंसा की है। नायडु ने माना कि कट्टमांची की आलोचनात्मक दृष्टि और विश्लेषणात्मक पद्धति ने तेलुगु साहित्य को समझने के लिए नए आयाम प्रदान किए हैं।
उप-राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे विद्वानों का कार्य भाषायी और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित और समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने माना कि साहित्यिक आलोचना केवल पाठ्य सामग्री का विश्लेषण नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम है।
नायडु ने भारतीय भाषाओं के विकास और उन्नयन के लिए विद्वानों और आलोचकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि तेलुगु साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए कट्टमांची जैसे विचारकों का योगदान अमूल्य है।
उप-राष्ट्रपति का यह कथन साहित्य और मानविकी के क्षेत्र में भारतीय विद्वानों की उपलब्धियों को स्वीकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।