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महाराष्ट्र का यह गांव दशहरे पर रावण की करता है पूजा, मानता है ग्राम देवता
महाराष्ट्र के अकोला जिले के सांगोला गांव में दशहरे का पर्व अन्य स्थानों से बिल्कुल अलग तरीके से मनाया जाता है। यहां रावण के पुतले का दहन नहीं होता, बल्कि दशानन की पूजा-अर्चना की जाती है।
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महाराष्ट्र के अकोला जिले की पातुर तहसील में स्थित सांगोला गांव की परंपरा देश के अधिकांश हिस्सों से सर्वथा भिन्न है। जहां देशभर में दशहरे के दिन बुराई के प्रतीक के रूप में रावण के पुतले का दहन किया जाता है, वहीं यह गांव रावण को ग्राम देवता और रक्षक के रूप में मानता है।
स्थानीय परंपरा के अनुसार, गांव के निवासी दशहरे पर दस सिरों वाले दशानन की पूजा करते हैं। गांववासियों का विश्वास है कि रावण की कृपा से उनका गांव सोने की लंका की तरह समृद्ध रहता है। यह अनूठी परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और गांव की सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण अंग बनी हुई है।
सांगोला गांव की यह परंपरा हिंदू पौराणिक कथाओं की विविधता और क्षेत्रीय सांस्कृतिक विशेषताओं को दर्शाती है। जहां अधिकांश समाज रामायण की कथा के अनुसार रावण को असुर मानता है, वहीं यह गांव अपने अलग दृष्टिकोण को बरकरार रखे हुए है। गांववासियों के लिए रावण केवल एक पौराणिक चरित्र नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक विरासत और आस्था का केंद्र बिंदु हैं।