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पुराने फोन कैमरों की कीमत को लेकर सोशल मीडिया पर गलत दावे
सोशल मीडिया पर यह दावा वायरल हो रहा है कि पुराने मोबाइल फोन के कैमरे स्क्रैप में ढाई लाख रुपये किलो की दर से बिकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे दावे बेबुनियाद हैं और लोगों को गुमराह करने के लिए किए जाते हैं।
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डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर नियमित रूप से पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की रीसाइक्लिंग से जुड़े ऐसे दावे प्रसारित होते हैं जो सामान्य नागरिकों को आकर्षक रिटर्न का वादा देते हैं। पुराने स्मार्टफोन के कैमरा मॉड्यूल को लेकर भी इसी तरह की बातें की जाती हैं, लेकिन इन दावों की वास्तविकता परीक्षण की कसौटी पर खरी नहीं उतरती।
ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, पुराने मोबाइल फोन के कैमरों में विभिन्न धातुएं और खनिज पदार्थ होते हैं जिनका पुनर्चक्रण संभव है। हालांकि, इन उपकरणों की बाजार कीमत सोशल मीडिया पर प्रचारित आंकड़ों से कहीं अधिक मामूली होती है। कैमरा मॉड्यूल में मौजूद गोल्ड, सिल्वर और अन्य धातुओं की निकासी एक जटिल तकनीकी प्रक्रिया है जिसमें विशेष सुविधाएं और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
इस तरह के संदिग्ध दावे आमतौर पर लोगों को ई-वेस्ट संग्रह के लिए प्रेरित करने हेतु प्रचारित किए जाते हैं। ऐसी योजनाओं में भाग लेने से पहले नागरिकों को सरकारी और अधिकृत रीसाइक्लिंग संगठनों से संपर्क करने की सलाह दी जाती है। प्रत्यायित ई-वेस्ट प्रबंधन केंद्र पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उचित तरीके से इन उपकरणों का निस्तारण करते हैं।