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विशाखापत्तनम में साल भर हवा की गुणवत्ता राष्ट्रीय मानदंड से खराब
विशाखापत्तनम के सभी 10 मॉनिटरिंग स्टेशनों में पिछले साल 259 दिन प्रदूषण की वार्षिक सीमा से अधिक रहा। शहर की भौगोलिक संरचना और सर्दियों में तापमान के उलटाव से प्रदूषकों में बढ़ोतरी होती है।
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विशाखापत्तनम की वायु गुणवत्ता पिछले 12 महीनों में गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। आंध्र प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में पता चला है कि शहर के सभी 10 निगरानी केंद्रों पर 382 दिनों में से 259 दिन कणीय प्रदूषण का वार्षिक राष्ट्रीय मानदंड टूटा गया। इसका अर्थ यह है कि साल के लगभग 68 प्रतिशत दिन शहर की हवा खतरनाक स्तर पर प्रदूषित रही।
विशेषज्ञों के अनुसार विशाखापत्तनम की कटोरीनुमा भौगोलिक संरचना प्रदूषण को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। यह संरचना वायु प्रवाह को बाधित करती है और प्रदूषकों को शहर में ही फंसाए रखती है। इसके अलावा, सर्दियों के मौसम में तापमान के उलटाव की घटना भी प्रदूषकों को वायुमंडल के ऊपरी हिस्सों में फंसा देती है।
शीतकाल में प्रदूषण की स्थिति सबसे गंभीर पाई गई। इस समय तापमान कम होने से प्रदूषक कण नीचे की ओर आ जाते हैं और जमीन के करीब रुक जाते हैं, जिससे वायु गुणवत्ता में तेजी से गिरावट आती है। शहर की औद्योगिक गतिविधियां और बढ़ते वाहनों का उत्सर्जन इस समस्या को और बदतर बनाता है।
यह आंकड़े स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए गंभीर चेतावनी हैं। लंबे समय तक खराब वायु गुणवत्ता में रहने से श्वसन संबंधी बीमारियों और हृदय रोगों का खतरा बढ़ता है। अधिकारियों से अब तक्षीर प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है।