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नवजात शिशुओं में विटामिन K इंजेक्शन न लगवाने से ब्लीडिंग का गंभीर खतरा
52 लाख से अधिक नवजात बच्चों पर किए गए शोध में पाया गया कि जन्म के समय विटामिन K का इंजेक्शन न लेने वाले शिशुओं में प्रारंभिक छह महीनों के दौरान आंतरिक ब्लीडिंग का जोखिम 47 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।
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एक व्यापक चिकित्सा अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि जन्म के समय विटामिन K का इंजेक्शन प्राप्त न करने वाले नवजात शिशुओं को गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। 52 लाख से अधिक बच्चों पर किए गए इस शोध से पता चला है कि ऐसे शिशुओं में जीवन के प्रारंभिक छह महीनों में ब्लीडिंग संबंधी रोगों का खतरा 47 प्रतिशत अधिक होता है।
अध्ययन के निष्कर्ष और भी चिंताजनक हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि विटामिन K इंजेक्शन न लेने वाले बच्चों में मस्तिष्क के अंदर रक्तस्राव का खतरा सामान्य स्तर से 2.4 गुना अधिक होता है। यह जटिलता बेहद गंभीर हो सकती है और बच्चे के विकास को प्रभावित कर सकती है।
विटामिन K रक्त के थक्के जमने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नवजात शिशुओं में प्राकृतिक रूप से इस विटामिन की कमी होती है, जिससे आसानी से ब्लीडिंग हो सकती है। चिकित्सा विशेषज्ञ जन्म के तुरंत बाद विटामिन K का इंजेक्शन लगवाने की सलाह देते हैं।
इस शोध के आधार पर स्वास्थ्य पेशेवार नई माताओं को अपने शिशुओं को सभी आवश्यक टीकाकरण और पोषक तत्वों से संबंधित इंजेक्शन समय पर लगवाने की महत्वता समझाते हैं। विशेषज्ञ यह स्पष्ट करते हैं कि यह एक सामान्य और सुरक्षित प्रक्रिया है जो बच्चे के जीवन को बचा सकती है।