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मसौदा मतदाता सूची से नाम न होना मतलब डिलीशन नहीं: चुनाव आयोग

बंबई उच्च न्यायालय को चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण एक नई मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया है, न कि केवल मौजूदा सूची को अद्यतन करने की। मसौदा सूची में किसी का नाम न होना स्वचालित रूप से हटाया जाना नहीं माना जाएगा।

LSN India · 14 October 2026

मसौदा मतदाता सूची से नाम न होना मतलब डिलीशन नहीं: चुनाव आयोग

चुनाव आयोग ने बंबई उच्च न्यायालय को बताया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान मसौदा मतदाता सूची में किसी का नाम न होना यह संकेत नहीं देता कि उस व्यक्ति को सूची से हटाया गया है। आयोग के अनुसार, यह प्रक्रिया मौजूदा मतदाता सूची को केवल अपडेट करने के बजाय एक पूरी तरह से नई मतदाता सूची तैयार करने का काम करती है।

आयोग ने न्यायालय को समझाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण और विशेष सारांश पुनरीक्षण में महत्वपूर्ण अंतर है। विशेष सारांश पुनरीक्षण में पहले से मौजूद सूची को केवल संशोधित और सुधारा जाता है, जबकि विशेष गहन पुनरीक्षण में संपूर्ण मतदाता सूची को शून्य से तैयार किया जाता है।

चुनाव आयोग के इस कथन का अर्थ है कि मसौदा सूची में किसी व्यक्ति का नाम न दिखाई देना केवल यह हो सकता है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। इसका मतलब यह नहीं है कि उस व्यक्ति को सूची से हटा दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि अंतिम सूची तैयार होने तक नाम जोड़े-हटाए जा सकते हैं।

यह स्पष्टीकरण मतदाता सूची से संबंधित विभिन्न याचिकाओं के संदर्भ में दिया गया है, जहां कई व्यक्तियों ने शिकायत की थी कि मसौदा सूची में उनके नाम दर्ज नहीं हैं। चुनाव आयोग का यह कथन उन चिंताओं को दूर करने का प्रयास है और पारदर्शिता के साथ मतदाता सूची तैयारी की प्रक्रिया को समझाता है।