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चुनावी सूची से छूटे नामों से मतदाता संख्या 2015 स्तर पर आई: डेटा
विशेष गहन संशोधन अभ्यास में चुनावी सूची से निकाले गए नामों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय एक याचिका सुनने के लिए सहमत हो गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को चुनौती देने वाली इस याचिका में पिछले बार की तुलना में काफी कम मतदाता दर्ज हैं।
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विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत चुनावी सूची से बड़ी संख्या में नामों को हटाए जाने से देश में मतदाताओं की संख्या 2015 के स्तर पर आ गई है। यह जानकारी विस्तृत डेटा विश्लेषण से सामने आई है, जिसमें पिछली तुलना में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
इस मामले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय एक जनहित याचिका पर विचार करने के लिए तैयार हो गया है। याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए हैं और दावा किया गया है कि एसआईआर अभ्यास में पारदर्शिता का अभाव रहा है।
चुनाव प्रक्रिया में मतदाता सूची की शुद्धता महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े पैमाने पर नामों को हटाने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। चुनाव आयोग का तर्क है कि एसआईआर से डुप्लिकेट और त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों को हटाया जाता है।
न्यायालय की सुनवाई के बाद इस प्रक्रिया की वैधता और इसके संचालन की विधि पर स्पष्टता आने की उम्मीद है। इस बीच, राजनीतिक दलों द्वारा भी चुनावी सूची में किए गए संशोधनों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।