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जल शोधन कचरे से बने फिल्टर से 97 प्रतिशत माइक्रोप्लास्टिक हटाए जा सकते हैं
शोधकर्ताओं ने जल शोधन प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न कचरे को माइक्रोप्लास्टिक फिल्टर में बदलने की नई विधि विकसित की है। यह अभिनव दृष्टिकोण दो पर्यावरणीय समस्याओं का एक साथ समाधान करता है।
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शोधकर्ताओं की एक टीम ने जल प्रदूषण से निपटने के लिए एक सर्कुलर इकोनॉमी आधारित समाधान तैयार किया है। यह नई प्रौद्योगिकि जल उपचार संयंत्रों से निकलने वाले अपशिष्ट को पुनर्उपयोग करके माइक्रोप्लास्टिक को फिल्टर करने में सक्षम है।
विभिन्न परीक्षणों के माध्यम से यह पता चला है कि इस तरीके से उत्पन्न फिल्टर माइक्रोप्लास्टिक को 97.1 प्रतिशत तक हटाने में सफल रहे हैं। यह उच्च दक्षता दर जल शोधन प्रक्रियाओं में एक महत्वपूर्ण सुधार साबित हो सकती है।
इस नवाचारी रणनीति का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह दो पर्यावरणीय चुनौतियों को एक साथ हल करती है। जहां एक ओर जल शोधन से निकलने वाले कचरे का सदुपयोग होता है, वहीं दूसरी ओर माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह विधि आने वाले समय में जल शुद्धिकरण प्रक्रियाओं को और अधिक प्रभावी और टिकाऊ बना सकती है। इस तकनीक का व्यावहारिक अनुप्रयोग भारत जैसे देशों में जल गुणवत्ता की समस्या से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।