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मानसून की कमी से खरीफ बुवाई में गिरावट, धान और तिलहन प्रभावित
अपर्याप्त मानसून वर्षा के कारण भारत में खरीफ सीजन की बुवाई क्षेत्रफल में 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। बुवाई का कुल क्षेत्रफल घटकर 105.7 मिलियन हेक्टेयर रह गया है।
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भारत में खरीफ मौसम की बुवाई में साल-दर-साल आधार पर 1.5 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कुल बुवाई क्षेत्रफल घटकर 105.7 मिलियन हेक्टेयर तक सीमित रह गया है। इस गिरावट का प्रमुख कारण देश के विभिन्न हिस्सों में सामान्य से कम मानसून वर्षा है।
मानसून की कमी का सबसे अधिक प्रभाव धान, मोटे अनाज और तिलहन फसलों पर पड़ा है। किसानों ने अनिश्चित मौसम और अपर्याप्त वर्षा के कारण बुवाई में सावधानी बरती है। धान की बुवाई विशेष रूप से प्रभावित हुई है, जो खरीफ सीजन की मुख्य नकदी फसलों में से एक है।
तिलहन क्षेत्र में भी इसी तरह की चिंता देखी जा रही है, जहां किसान अच्छी पैदावार के लिए पर्याप्त नमी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मौसम पूर्वानुमान विभाग के अनुसार, आने वाले सप्ताहों में वर्षा की स्थिति में सुधार की संभावना है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगली अवधि में सामान्य वर्षा हो तो पिछली गिरावट को आंशिक रूप से पूरा किया जा सकता है।
कृषि क्षेत्र के लिए मानसून की महत्ता को देखते हुए, सरकार किसानों को आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है। फसल बीमा योजनाओं और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है ताकि मानसून की अनिश्चितता से किसानों को बेहतर सुरक्षा मिल सके।