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मानसून की कमजोर बारिश से किसान और बिजली क्षेत्र प्रभावित
खरीफ फसल की बुवाई 2022 के बाद सबसे न्यून स्तर पर पहुंची है। भूजल के तेजी से दोहन ने समस्या को और गंभीर बना दिया है।
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इस मानसून में अपर्याप्त वर्षा के कारण देश के कृषि क्षेत्र को गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। खरीफ फसल के अंतर्गत कृषि योग्य क्षेत्र में आई गिरावट पिछले तीन वर्षों में सर्वाधिक है, जो किसानों की आजीविका को सीधे प्रभावित कर रही है।
कमजोर मानसून के कारण वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों में उत्पादकता में भारी गिरावट दर्ज की गई है। पारंपरिक सिंचाई के साधन अपर्याप्त साबित हो रहे हैं क्योंकि भूजल स्तर पहले से ही गंभीर रूप से प्रभावित है। बोरवेल और कुओं पर निर्भर किसानों के लिए पानी की उपलब्धता में तेजी से कमी आ रही है।
विद्युत उत्पादन क्षेत्र भी इस स्थिति से अछूता नहीं रहा है। जलविद्युत संयंत्रों का प्रदर्शन कम जलप्रवाह के कारण प्रभावित हो रहा है, जिससे राष्ट्रीय विद्युत आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है। सूखे की संभावना बढ़ने से कृषि सिंचन के लिए डीजल संचालित पंपों का उपयोग बढ़ेगा, जो किसानों की लागत को और बढ़ाएगा।
कृषि मंत्रालय और संबंधित विभाग अनुमानित खरीफ उत्पादन में होने वाली कमी को लेकर चिंतित हैं। मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमानों के अनुसार आने वाले सप्ताहों में स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं होने की संभावना है।