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RERA लागू करने में विफल राज्य, 27.6 लाख खरीदारें परियोजनाओं में फंसी
रियल एस्टेट नियामक कानून के दस साल पूरे होने पर आवास क्रेताओं के संगठन ने राज्यों में कानून के कार्यान्वयन में गंभीर कमियां उजागर कीं। देश भर में 27.6 लाख होमबायर्स विलंबित परियोजनाओं का शिकार हैं।
LSN India ·

रियल एस्टेट क्रेताओं के हित में काम करने वाले फोरम फॉर पीपुल्स कलेक्टिव एफर्ट्स (एफपीसीई) ने बुधवार को कहा कि विभिन्न राज्यों के नियामक प्राधिकार रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 को सही ढंग से लागू करने में विफल रहे हैं। एफपीसीई की 192 पृष्ठों की रिपोर्ट 'रेरा एक्सटेंशन एब्यूज: हाउ रेगुलेटरी फेलियर इज बिट्रेइंग इंडियाज होमबायर्स' में यह निष्कर्ष निकाला गया है।
संसद द्वारा 2016 में पारित इस अधिनियम का उद्देश्य होमबायर्स और प्रमोटरों के बीच अनुबंधात्मक संबंधों को विनियमित करना था। रेरा कानून रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करके क्रेताओं के हितों की रक्षा करने के लिए बनाया गया था।
एफपीसीई के अध्यक्ष अभय उपाध्याय ने कहा कि रेरा स्वयं कानून के रूप में विफल नहीं हुआ है, बल्कि इसके कार्यान्वयन में कमजोरी आई है। उन्होंने कहा कि जब कार्यान्वयन कमजोर पड़ जाता है तो सबसे मजबूत कानून भी व्यावहारिक रूप से विफल हो जाता है।
रिपोर्ट हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स मंत्रालय के रेरा ट्रैकर डेटा पर आधारित है। इस रिपोर्ट से पता चलता है कि देश में बड़े पैमाने पर परियोजनाएं अपने निर्धारित समय सीमा से परे चल रही हैं, जिससे लाखों क्रेताओं को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।